हनुमान जी मंदिर टिकरिया में एक माह की कठिन तपस्या कर रहे रामपाल संत

अमरेश राजपूत
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हनुमान जी मंदिर टिकरिया में एक माह की कठिन तपस्या

अमरेश राजपूत की खास रिपोर्ट
16 जून को विशाल भंडारा आयोजित 
 
टिकरिया महोबा 
   बुंदेलखंड क्षेत्र में धर्म की ध्वजा फहराने के लिए एक से एक चमत्कार जनता के सामने दिखाई देने लगे हैं । छोटे से ग्राम टिकरिया अजनर महोबा उत्तर प्रदेश के रहने वाले श्री रामपाल  राजपूत संत जी को हनुमान जी की ऐसी प्रेरणा मिली है कि वह चिल्लाती तपती धूप में अपनी तपस्या करने में एक माह का संकल्प लेकर खुले मैदान में बैठे हैं उनके त्याग और तपस्या देखने  के लिए क्षेत्र के अनेक ग्रामों से टिकरिया पहुंच रहे हैं ।
 महोबा जनपद  ग्राम टिकरिया 15 मई 2026 से जन चर्चा और सुर्खियों में पहुंच चुका है यहां के एक राजपूत परिवार के बालक को बचपन से गांव के श्री बड़े हनुमान जी मंदिर जो गांव से एकांत में है पूजा अर्चना साधना करना उनकी दिनचर्या थी और इसी कारण वह लगातार श्री हनुमत सेवा  साधना के रास्ते तय करने लगे सर्वप्रथम उन्होंने 24 घंटे की मंदिर के पास समाधि ली दूसरी समाधि 48 घंटे की तीसरी समाधि 72 घंटे की और चौथी समाधि सीधी 21 दिन की लेकर के जनमानस में चर्चा में आए 11 दिनों तक शरीर में पत्थर बांधकर जल समाधि लेकर उन्होंने अपनी त्याग तपस्या और साधना को मंदिर पर प्रदर्शित किया उनकी ख्याति और धर्म की चर्चा आसपास के क्षेत्र में फैली और इसी के साथ उन्होंने 15 फरवरी 2026 को 51 गरीब बेसहारा बेटियों का विवाह का संकल्प जो लिया था उसे जनमानस से शिवरात्रि को पूरा किया गया अब उनकी साधना भीषण गर्मी में 15 मई से शुरू हुई जो 15 जून को साधना पूरी हो रही है और 16 जून को विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है ।
   टिकरिया अजनर जनपद महोबा नौगांव कस्बा से 26 किलोमीटर दूर महोबा से 40 किलोमीटर दूर हरपालपुर से 32 किलोमीटर दर एवं क्षेत्रीय सांसद श्री अजेंद्र राजपूत जी के ग्रह ग्राम कनकुआ से 15 किलोमीटर दूर यह धार्मिक स्थान है जहां पर प्रत्येक मंगलवार को और शनिवार को सैकड़ो की संख्या में भक्त लोग पहुंच रहे हैं 
 पुजारी पंडित श्री सुरेंद्र द्विवेदी जी ने दी जानकारी  अवसर पर गांव के राम सिंह राजपूत कृपाल सिंह संतोष नामदेव सतीश राजपूत वीर सिंह राजपूत प्रतिदिन  अवलोकन करना चाहते हैं तो आप मंगलवार को सुबह 6:00 बजे से श्री हनुमान जी मंदिर पर पहुंचे और 9:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक उनकी साधना का प्रत्यक्ष दर्शन करिए और धर्म का ध्वज फहराने में सहयोग करें ।

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